Thursday, October 06, 2011

निंदिया

आजा रे आजा ... ओ मेरी निंदिया ..
तकती हैं राह यह सूनी अँखियाँ ..
आजा रे आजा ओ मेरी निंदिया

उदास यह पलकें ..बुलाएं तुझे ..
ना कर और नखरे ..यह मनाये तुझे
ना कर अब देर ..तू जल्दी आ ..
हो गयी सवेर ..तू जल्दी आ

अब और ना तरसा ..ओ आँखों की डिबिया
आजा रे आजा .. ओ मेरी निंदिया.


कुछ देर रहना मैं चाहूँ तेरी ..पन्हा में
ले चल तू मुझे ..अपने उस जहान में
जहाँ आंसू नही ..दर्द नही
एक दूसरे में कोई फर्क नही.
सब अछा ..सब अपना है
जानता हूँ ..सब छलिया एक सपना है

धुन्डून आज वो छल ..वो सपनो की दुनिया
आजा रे आजा ...ओ मेरी निंदिया

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