Friday, December 16, 2011

अब तो देख मुझे


ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
आँखें खोल और देख मुझे
मैं हर पल बस सोचूं तुझे
रात में .. दिन में ...आज में ..कल में
हर आते जाते ..छोटे.. बड़े पल में
मैं बस तुझे ही याद करूं
अकेले में भी तुझसे ही बात करूं
तू साथ है मेरे
एक एहसास की तरह
कानो में .. मीठी सी आवाज़ की तरह

ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
भूलूं भी तो कैसे तुझे
थामा है तूने ऐसे मुझे
जैसे मोती को सीप ने
लौ को उसके दीप ने
कैसे बताऊँ .. कैसे समझाऊं तुझे
मेरे उपर छाप बस तेरी है
फिर क्यूँ तूने मुझसे आँखें फेरी हैं

ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
मेरे ख्यालों में खोजा एक बार
खुद को भूल ..मेरी .. बस मेरी होजा एक बार
तेरा हूँ मैं ..पूछ ले खुद से चाहे तो
जब तेरा मन भी सहमत हो ...बुला लियो मुझे
अगर याद मेरी आये तो
जिन आँखों में हसी है तेरी.. क्यूँ हैं वो आज रोई सी
पहचान ले अब मुझे
ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी