Saturday, December 01, 2012

ख्वाइश

एक रात मैंने आसमान में तारे देखे कई ..

उनमें से एक पे नाजाने क्यूँ .. नज़र ठहर गयी।

सब जैसा ही .. फिर भी अलग ..

टिमटिमाहट .. उसकी अनघ।

जैसे मुद्दतों से मुझे उसी का इंतज़ार था ..

हर रोज़ देखने का .. इक जुनून सा सवार था।

पता भी ना चला और आदत बन गया वो ..

मेरी प्राथना का हिस्सा .. मेरी इबादत बन गया वो।


कई रातें बितायी उसकी रौशनी के नीचे ..

पड़ा रहता था रात भर यूँही .. आँखें मीचे।

पाने की चाह में कूद गया एक दिन ..

सोचा मुठी में बंद करके .. नीचे ले आऊंगा।

भूल गया था उड़ान सीमित है मेरी

और आसमा कभी किसी के लिए झुकता नहीं ..

मुह के बल गिरा।




Friday, March 30, 2012

मेरा राम तुझसे है

कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरी मंजिल तू ... मेरा रास्ता तुझसे है

कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मुझे हासिल तू ... मेरा वास्ता तुझसे है.


कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरा जीवन तू ... मेरे जीने की आशा तुझसे है

कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरा हर कण तू ... मेरे होने की परिभाषा तुझसे है.


कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरी आस तू ... मेरा अतीत तुझसे है

कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरी सांस तू ... मेरा नसीब तुझसे है.


कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मुझसे जुड़ा तू ... मेरा नाम तुझसे है

कैसे जाऊं तुझसे दूर मैं

मेरा खुदा तू ... मेरा राम तुझसे है.

Friday, December 16, 2011

अब तो देख मुझे


ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
आँखें खोल और देख मुझे
मैं हर पल बस सोचूं तुझे
रात में .. दिन में ...आज में ..कल में
हर आते जाते ..छोटे.. बड़े पल में
मैं बस तुझे ही याद करूं
अकेले में भी तुझसे ही बात करूं
तू साथ है मेरे
एक एहसास की तरह
कानो में .. मीठी सी आवाज़ की तरह

ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
भूलूं भी तो कैसे तुझे
थामा है तूने ऐसे मुझे
जैसे मोती को सीप ने
लौ को उसके दीप ने
कैसे बताऊँ .. कैसे समझाऊं तुझे
मेरे उपर छाप बस तेरी है
फिर क्यूँ तूने मुझसे आँखें फेरी हैं

ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी
मेरे ख्यालों में खोजा एक बार
खुद को भूल ..मेरी .. बस मेरी होजा एक बार
तेरा हूँ मैं ..पूछ ले खुद से चाहे तो
जब तेरा मन भी सहमत हो ...बुला लियो मुझे
अगर याद मेरी आये तो
जिन आँखों में हसी है तेरी.. क्यूँ हैं वो आज रोई सी
पहचान ले अब मुझे
ओ सोयी हुई सी
अपने ही ख्यालों में खोयी हुई सी